इस सप्ताह की चर्चित 5 कहानियाँ जानें!

फ़िल्म और संगीत की जानकारी:

फ़िल्म: मलेफिसंट 2 रिलीज़ हुई और साथ ही स्टार वार्स की नई फ़िल्म का 9 वां ट्रेलर भी जो दिसंबर 2019 में रिलीज़ होगा।

संगीत: हैरी स्टाइल्स (जो वनडी के पूर्व सदस्य हैं और अब एक एकल कलाकार) का नया गाना, लाइट्स अप, सबसे प्रसिद्ध गानों में से एक है। ट्रैविस स्कॉट का हाईएस्ट इन द रूम बिलबोर्ड हॉट 100 चार्ट में पहले नंबर पर है। पोस्ट मलोन का सर्कल्स और मरून 5 की मेमोरीज़ की प्रसिद्धि अभी भी हॉट 100 पर बढ़ती जा रही है।

लेबनान: पिछले कुछ दिनों में लेबनान में व्यापक विरोध प्रदर्शन हुए हैं। लेबनानी बेहतर रहन-सहन और वर्तमान राजनीतिक व्यवस्था में बदलाव की मांग कर रहे हैं। उन्हें दैनिक बिजली की कटौती, सड़कों के किनारे कूड़ेदान, पानी की आपूर्ति में उतार-चढ़ाव और उच्च कर की दर जैसी कुछ बड़ी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। यह विरोध किस बात से भड़क उठा? सरकार ने सभी व्हाट्सएप वॉयस कॉल पर $0.20 टैक्स जोड़ने की योजना पेश की। ऐसा लगता है कि इससे लोगों के सब्र का बाँध टूट गया, और इस असंतोष पर चर्चा के साथ-साथ बेहतर राजनीतिक और आर्थिक प्रबंधन की मांग की जा रही है। इस आंदोलन के बारे में अधिक पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

ब्रेक्सिट: ब्रिटेन के प्रधान मंत्री, बोरिस जॉनसन 31 अक्टूबर तक यूरोपीय संघ के साथ अपने ब्रेक्सिट सौदे को टालने की कोशिश कर रहे हैं। ब्रिटिश संसद ने उनसे कहा कि वे यूरोपीय संघ से एक विस्तार के लिए पूछें, जो करने के लिए वे बाध्य थे, लेकिन वे अभी भी अपने किए हुए सौदे के लिए समर्थन प्राप्त करने की कोशिश कर रहे हैं। इसके बारे में अधिक पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

टेनिस! टेनिस चैंपियन, रफ़ाएल नडाल ने पिछले सप्ताहांत शादी कर ली! कई वर्षों से उनकी प्रेमिका रही, ज़िस्का परेलो ने स्पेन के मैजोर्का में उनसे शादी की।

अंतरिक्ष: दो महिला अंतरिक्ष यात्रियों ने इस सप्ताहांत में अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन के बाहर पहली ऑल-वीमेन अंतरिक्ष यात्रा को पूरा करके इतिहास बनाया। उन्होंने 7 घंटे और 17 मिनट तक अंतरिक्ष स्टेशन की सीमा के बाहर रहकर एक ख़राब बैटरी को बदला। बेशक महिलाओं ने पुरुषों की एक टीम के साथ पहले अंतरिक्ष की सैर की है। इस बारे में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें!


अकेली महिलाओं की पहली स्पेसवॉक बनी ऐतिहासिक पल!

ख़बर: अंतरिक्ष यात्री क्रिस्टीना कोच और जेसिका मीर ने कुछ मरम्मत कार्य करने के लिए अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) के बाहर कदम रखकर,इतिहास रच दिया। यह अब तक की पहली स्पेसवॉक थी जिसमें सिर्फ़ महिलाएं थी।

स्पेसवॉक क्या है? जब कोई अंतरिक्ष यात्री अंतरिक्ष में किसी वाहन से बाहर निकलता है, तो उसे स्पेसवॉक के रूप में जाना जाता है; यह चलना कम और अंतरिक्ष में तैरना अधिक है। एक स्पेसवॉक के दौरान, अंतरिक्ष यात्री अपने अंतरिक्ष यान और उपकरणों की मरम्मत कर सकते हैं, नए उपकरणों का परीक्षण कर सकते हैं और यहां तक ​​कि विज्ञान के प्रयोग भी कर सकते हैं! क्या आप जानते हैं कि स्पेसवॉक का प्रशिक्षण करने के लिए अंतरिक्ष यात्री एक बड़े स्विमिंग पूल में पानी के नीचे चलने का या वर्चुअल रियलिटी हेलमेट का इस्तेमाल करने का अभ्यास करते हैं!

क्या उन्हें वे बिग स्पेससूट पहनने की ज़रूरत है? बिल्कुल है!  स्पेससूट अंतरिक्ष यात्रियों को अंतरिक्ष में सुरक्षित रखते हैं- उन सूट में सांस लेने के लिए ऑक्सीजन होती है और पीने के लिए पानी । साथ ही यह अंतरिक्ष यात्री को सुरक्षा टेथरों (जैसे रस्सियां) का उपयोग करके अंतरिक्ष यान से जुड़े रहने में मदद करता है, जिसका एक छोर अंतरिक्ष यात्री के सूट से जुड़ा होता है और दूसरा छोर अंतरिक्ष यान से। इसके बिना, अंतरिक्ष यात्री अंतरिक्ष में दूर बह सकता है क्योंकि वहाँ गुरुत्वाकर्षण नहीं है!

 

वास्तव में, अंतरिक्ष यात्रियों को अपने उपकरणों को अपने स्पेससूट में सुरक्षित रखना होता है ताकि उन्हें अंतरिक्ष में खो जाने से रोका जा सके!

क्यों खास थी ये स्पेसवॉक? आईएसएस के बाहर 200 से अधिक स्पेसवॉक हो चुकी हैं। ज्यादातर स्पेसवॉक पुरुष अंतरिक्ष यात्रियों या पुरुष और महिला अंतरिक्ष यात्रियों ने साथ में की हैं। लेकिन ये पहली वॉक हैं जिसमें सिर्फ़ महिलाएं थी!

सोच रहे हैं कि उन्हें क्या काम था? इन दोनों को एक ख़राब बैटरी चार्जर को बदलना था जो आईएसएस पर बिजली की आपूर्ति के लिए महत्वपूर्ण है। उनका मिशन 7 घंटे 17 मिनट तक चला जिसके दौरान उन्होंने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के साथ संक्षिप्त बातचीत भी की।

नासा द्वारा जारी इस वीडियो में महिलाओं को काम करते दिखाया गया है।

क्या आपको पता था?

इस ऐतिहासिक स्पेसवॉक की मूल रूप से मार्च में योजना बनाई गई थी लेकिन इसे रद्द करना पड़ा क्योंकि अंतरिक्ष स्टेशन पर केवल एक मध्यम आकार का सूट उपलब्ध था।

यह सुनिश्चित करने के लिए कि ऐसा दोबारा न हो, नासा ने नए स्पेससूट डिज़ाइन किए हैं जो हर मानव शरीर के लिए फिट हैं। यह 2024 आर्टेमिस मिशन को ध्यान में रखते हुए बनाया गया है जिसके तहत पहली बार कोई  महिला चंद्रमा पर चलेगी।

मजेदार तथ्य: 1984 में, अंतरिक्ष यात्री स्वेतलाना सवित्सकाया अंतरिक्ष में चलने वाली पहली महिला बनी।

लेखक: प्रीतिका सोनी एक माँ हैं। खाली समय में उन्हें लिखना, फ़ोटोग्राफी और क्रोशिया करना पसंद है। वे एनडीटीवी, मुंबई और एससीएमसोफ़िया से जुड़ी रही हैं।


अकेली महिलाओं की पहली स्पेसवॉक बनी ऐतिहासिक पल!

जेसिका मीर, क्रिस्टीना कोच

फ़ोटो: नासा। स्पेसटैकएशिया


लेबनॉन में विरोध क्यों हैं?

लेबनॉन मध्य पूर्व (मिडिल ईस्ट) का एक देश है। पर ये खबरों में क्यों है? ज़िंदगी जीने के लिए बेहतर सुविधाएं और वर्तमान राजनीतिक नीतियों में बदलाव की मांग को लेकर लेबनॉन के नागरिक सड़कों पर उतार आए हैं।

 

विरोध तब शुरू हुआ जब सरकार ने सभी व्हाट्सएप वॉइस कॉल पर 0.20 डॉलर टैक्स जोड़ने की योजना लागू करने का फैसला किया। हालांकि सरकार ने योजना को कुछ ही घंटों के अंदर खारिज कर दिया, लेकिन प्रदर्शन जारी है।

 

वे विरोध क्यों  कर रहे हैं? लेबनॉन के नागरिक हर रोज़ बिजली कटौती, कचरों से भरी सड़कों, पानी की कम आपूर्ति और उच्च कर दरों से परेशान हो चुके हैं।

एक मिलियन से अधिक सीरियाई शरणार्थियों के यहाँ आने से पहले से ही कमज़ोर सार्वजनिक सेवाएं और बदतर हो गई हैं। नागरिक व्यापक भ्रष्टाचार से थक चुके हैं जिसका कारण यहाँ की सरकार और उनका वित्तीय कुप्रबंधन है।

https:/न्यूज़.स्काय. कॉम/स्टोरी/सरकार के भष्टाचार के खिलाफ़ पूरा देश एकजुट -11841691

लेबनॉन में वर्तमान आर्थिक स्थिति कैसी है? यह दुनिया में सबसे अधिक सार्वजनिक ऋण लेने वालों में से एक देश है। इसका मतलब है कि इसने देश के बाहर के व्यवसायों और यहां तक ​​कि अन्य सरकारों से भी पैसा उधार लिया है। ऋण 86 बिलियन डॉलर पर आंका गया है, जो कि देश के राजस्व (जीडीपी – सकल घरेलू उत्पाद जो कि एक वर्ष के दौरान देश में प्रदान उत्पन्न किए गए माल और प्रदा सेवाओं का कुल मूल्य है) से कई गुना अधिक है। देश कर्ज चुकाने में असमर्थ है। सरकार ने इस घाटे की भरपाई के लिए जो काम किए हैं, उनमें से एक है उच्च टैक्स वसूलना। यह नागरिकों को पसंद नहीं आया।

 

सरकार ने इस विरोध के जवाब में क्या किया?

इस विरोध के जवाब में, प्रधानमंत्री साद हरीरी और उनकी सरकार ने बेहतर सुविधा देने के लिए राजनेताओं के वेतन में आधी कटौती करने और गरीब परिवारों को वित्तीय सहायता देने जैसे कदम उठाए हैं।


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भूमध्य एसएएजीएआर

अल मिना,  ट्राइपोलि,  चेक्का,  बट्रोन, जूनिया, बेयरूत,

सिडोन, टायर, लेबनॉन, बाबदा, बेका वैली, ओरोंटिज़ नदी, डमास्कस,  इज़राइल

 

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आर्कटिक सर्कल

यूरोप, एशिया, ब्लैक सागर, कैस्पियन सागर, अरोल सागर, मिडिल ईस्ट, कर्क रेखा, लेबनॉन, रेड सागर, अरब सागर, बंगाल की खाड़ी, प्रशांत महासागर, अफ़्रीका, अदन की खाड़ी

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सभी उद्यमी ध्यान दें: हैकबेरी कॉम्पिटिशन फिर आ गया है, वो भी ग्रैंड प्राइज़ के साथ

पिछले दिसम्बर, 10 से 15 वर्ष तक के 23 बाल उद्यमियों (किडप्रेन्योर) ने बॉम्बे स्टॉक एक्स्चेंज के भव्य कन्वेन्शन सेंटर का स्टेज संभाला और वहाँ से जजों की एक पैनल के सामने अपने बिज़नेस आइडिया प्रस्तुत किए। पुराने स्कूल यूनिफ़ॉर्म से बने बैग से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में ज़रूरत पड़ने पर डॉक्टर की उपलब्धता, बच्चों की लाइब्रेरी, कारपूल, ट्यूशन सेवा और अन्य जरूरतों के लिए एप और ऐसे कई सारे जोश से भरे, एकदम नए और रणनीति के साथ सोचे गए बिज़नेस प्लान जजों के सामने पेश किए गए। इन युवा उद्यमियों ने पूरे आत्मविश्वास के साथ अपने आइडिया सबके सामने रखे जिन्हें प्रेस, व्यावसाय से जुड़े लोगों, मेंटर्स, बच्चों के परिवार वालों और दोस्तों ने बहुत सराहा।  यह किडप्रेन्योर पिच चैलेंज, 2018 हैकबेरी के बिज़नेस प्लान कॉम्पिटिशन की शुरुआत थी वह भी 10 से 15 साल तक के बच्चों के लिए।

इस साल, हैकबेरी 10-15 साल की उम्र के छात्रों के लिए एक बार फिर द किडप्रेन्योर कॉम्पिटिशन 2019 आयोजित कर रहा है । इसमें बच्चे अकेले या चार सदस्यों तक की टीम के रूप में हिस्सा ले सकते हैं। प्रतियोगिता और हैकबेरी के उद्यमिता कार्यक्रमों के बारे में अधिक जानने के लिए डबल्यूडब्ल्यूडब्ल्यू.हैकबेरीकिड्स.कॉम  पर जाएं।

आवेदन  की प्रक्रिया शुरू हो गई है और इसकी अंतिम तारीक 16 नवंबर, 2019 है।

अगर आपके पास भी है कोई बिज़नेस आइडिया तो ज़रूर भागीदारी करें!


हैकबेरी एंड हिंदुस्तान टाइम्स

किडप्रेन्योर कॉम्पिटिशन

 

सभी बाल उद्यमी भाग लेने के लिए आमंत्रित हैं!

बस आपके पास होना चाहिए एक अनोखा आइडिया!

स्टूडेंट्स आमंत्रित हैं एक ऐसे आइडिया के साथ जो उन्हें लगता है कि उनके सामने की चुनौती को हल कर सकता है

चुने गए आवेदकों को मौका मिलेगा अपने आइडिया को जजों की पैनल के सामने किडप्रेन्योर पिच चैलेंज में प्रस्तुत करने का

और जीत सकते हैं ग्रैंड प्राइज़!

आयु वर्ग

10- 12 साल/ 13- 15 साल

आवेदन की आखिरी तारीख

16 नवंबर

रिज़ल्ट की घोषणा

23 नवंबर 

मेंटरिंग राउंड

30 नवंबर

किडप्रेन्योर पिच चैलेंज

7 दिसम्बर

भागीदारी व्यक्तिगत रूप से या चार सदस्यों तक की टीम के रूप में कर सकते हैं

अभी आवेदन करें!

डब्ल्यूडब्ल्यूडब्ल्यू.हैकबेरीकिड्स.कॉम

कॉन्टैक्ट

इन्फ़ो@ हैकबेरीकिड्स.कॉम

प्रायोजककर्ता


कुछ सवाल सुपर गर्ल नेहा जे. हीरानंदानी से जिनकी लिखी बच्चों की किताब बड़ी मात्रा में बिक रही है

लेखक: नेहा हीरानंदानी

मिलिए सुपर गर्ल नेहा हीरानंदानी से, जिनकी लिखी बच्चों की किताब “गर्ल पावर: इंडियन वीमेन हू ब्रोक द रूल्स” तेज़ी से बिक रही है:

इस पुस्तक को लिखने की प्रेरणा आपको कहाँ से मिली?

मेरी 7 साल की बेटी, ज़ोया को विद्रोही लड़कियां बेहद पसंद थी । एक माँ के रूप में, मैं उसे दुनिया भर की अविश्वसनीय महिलाओं से प्रेरित होता देखकर बहुत खुश थी। लेकिन फिर एक दिन वह रिबेल गर्ल्स की अपनी पसंदीदा कॉपी लेकर मेरे पास आई और उदास होकर मैरी कॉम और रानी लक्ष्मीबाई की ओर इशारा करते हुए उसने पूछा “क्या भारत में केवल दो ही विद्रोही हैं?”   बेशक, मैं तुरंत उसे उन सभी अभूतपूर्व महिलाओं के बारे में बताना चाहता थी जो भारत में जन्मी- हमारी वे महिलाएं जिन्होंने नियम तोड़े, जो स्वतंत्र विचार की थी, जिन्होंने नई ऊचाईयां हासिल की। हमने अगले कुछ महीने इन महिलाओं की खोज में बिताए। यह शानदार था! मुझे जल्द ही एहसास हुआ कि ये ऐसी कहानियाँ थीं जो हमारी सभी लड़कियाँ – और यहाँ तक कि हमारे लड़कों को भी पता होनी चाहिए। आपने यह शानदार डेटा कैसे इकट्ठा किया? यह किताब कई कारणों से मेरे लिए हमेशा खास रहेगी। इसने मुझे कई अविश्वसनीय महिला और पुरुषों से मिलवाया। रेलवे स्टेशनों और खाली खेतों जैसी जगहों पर मैंने चाय की चुस्कियों के साथ लोगों से उन महिलाओं के बारे में बात की जिन्होंने उन्हें प्रेरित किया। कुछ कहानियाँ काम नहीं आई क्योंकि उनके तथ्यों की पुष्टि नहीं हो सकी, लेकिन बाक़ी से बात बन गई। बेशक इसके लिए घंटों ऑनलाइन और धूल भरी लाइब्रेरियों में रिसर्च किया। लेकिन कई कहानियां दूसरे लोगों से आईं। कभी-कभी, आपको सिर्फ बातचीत करनी होती है!

 

आपको पुस्तक लिखने में कितना समय लगा? शुरुआत से लेकर खत्म होने तक इसमें एक साल का समय लगा। और महिलाओं को प्रोफ़ाइल के अनुसार चुनना सबसे कठिन और इस काम का सबसे अच्छा हिस्सा था! हर कहानी ने मुझे भारतीय होने पर गर्व महसूस कराया। इस किताब में आप एक जासूस राजकुमारी से मिलेंगे जिसने फ्रांस में पैराशूट के ज़रिए प्रवेश किया, एक योद्धा रानी जिसने पुर्तगालियों से भारत को छह बार बचाया! इसमें सुहासिनी मिस्त्री है जो स्वास्थ्य देखभाल के लिए पद्म भूषण जीतने से पहले एक नौकरानी के रूप में काम करती थीं, और 80 से भी ज़्यादा उम्र की चंद्रो तोमर, जो कि शार्पशूटर हैं, जिन्हें रिवॉल्वर दादी के नाम से जाना जाता है। बेशक, पीवी सिंधु और प्रियंका चोपड़ा सहित कुछ लोकप्रिय नाम भी हैं। लेकिन व्यक्तिगत रूप से, मुझे अनकही कहानियों पर बहुत गर्व है। उनकी खोज करना बहुत रोमांचक था!  आपको क्यों लगता है कि बच्चों और बड़ों को इसे पढ़ना चाहिए? क्योंकि वास्तव में लोग काल्पना की तुलना में सत्य से ज़्यादा अनजान हैं! गर्ल पावर में वास्तविक जीवन के सुपरहीरो हैं। क्या आप जानते हैं कि पाँच महाद्वीपों के समुद्रों में तैरने वाली पहली महिला एक भारतीय है? बुला चौधरी ने अपने घर के बाहर एक तालाब में तैरना सीखा। क्या आप जानते हैं कि तीरंदाजी में दुनिया की नंबर वन, एक भारतीय महिला है? दीपिका कुमारी ने घर के बने बांस के धनुष के साथ शूटिंग शुरू की क्योंकि वे सिर्फ़ यही वहन कर सकती थी। क्या आप जानते हैं कि मंगल ग्रह पर एक पहाड़ी का नाम कल्पना चावला के नाम पर रखा गया है? हर पेज में एक आश्चर्य चकित करने वाला तथ्य  है! यहाँ किताब का एक अंश दिया गया है, उम्मीद है कि आपको भी  उतना ही आनंद मिलेगा जितना हमें मिला!

स्कोलैस्टिक इंडिया की अनुमति से नेहा जे हीरानंदानी  की किताब  “गर्ल पावर: इंडियन वीमेन हू ब्रोक द रूल्स” का अंश प्रस्तुत किया गया है। यह किताब क्रॉसवर्ड बुकस्टोर्स और ऑनलाइन अमेज़न पर यहाँ उपलब्ध है


स्कोलैस्टिकस्कोलैस्टिक

 

गर्ल पावर!

 

इंडियन वीमेन हू ब्रोक द रूल्स

 

नेहा जे हीरानंदानी

 

50 अद्भुत महिलाएं

 

50 प्रेरणादायक कहानियाँ

 

ज़िंदगी बदलने वाला एक पल


ब्रेक्ज़िट में अभी क्या चल रहा है?

समाचार: पिछले सप्ताह यह बताया गया था कि ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन और यूरोपीय संघ के नेताओं ने ब्रेक्ज़िट सौदे के लिए सहमति व्यक्त की थी। वाह! क्या इसका मतलब यह है कि सौदा हो गया? नहीं, उत्तरी आयरलैंड के राजनेता (याद रखें उत्तरी आयरलैंड यूके का हिस्सा है)और ब्रिटिश संसद को अभी इन शर्तों के लिए सहमत होना ज़रूरी है।

 

अभी क्या स्थिति है? शनिवार को ब्रिटिश सांसदों ने बोरिस जॉनसन को कहा कि उन्हें यह सौदा नापसंद है और उनसे कहा है कि वे वापस जाएं और यूरोपीय संघ से ब्रेक्ज़िट की 31अक्टूबर तक की समयसीमा को और बढ़ाने के लिए कहें। उन्होंने यूरोपीय संघ को यह कहते हुए पत्र भेजा कि यह उनकी इच्छाओं के खिलाफ है! लेकिन वे कहते हैं कि उन्हें अभी भी विश्वास है कि वे ब्रिटेन को 31अक्टूबर की समयसीमा तक सौदा पूरा करने के लिए मना लेंगे। अड़चन क्या है? एक प्रमुख मुद्दा है आयरलैंड (ईयू का हिस्सा) और उत्तरी आयरलैंड (यूके का हिस्सा)के बीच सीमा पर स्थित जांच चौकियों की जगह।

 

 

एक बार जब यूके, यूरोपीय संघ से अलग हो जायेगा तो यह सीमा यूके और यूरोपीय संघ के बीच भौतिक संपर्क का एक बिंदु होगा और इस सीमा के पार जाने वाले सामान पर सीमा शुल्क लागू होगा। इस सीमा पार लोगों के आने-जाने पर  भी काफी हद तक नियंत्रण किया जाएगा। यह आयरिश के लिए उनके इतिहास को देखते हुए एक कठिन मुद्दा है, जहां कुछ आयरिश लोग ऐतिहासिक रूप से आयरलैंड गणराज्य का हिस्सा बनना चाहते थे और कुछ यूके का हिस्सा बनना चाहते थे। इसके चलते लगभग 30 साल खून बहाया गया जब तक कि युद्धविराम और समझौते के लिए सहमती नहीं बन गई। ब्रेक्ज़िट के लिए यूके और यूरोपीय संघ के बीच जो सीमा ज़रूरी है वह इस समझौते के लिए खतरा है।  आगे क्या होगा? इस समझौते पर उत्तरी आयरलैंड और ब्रिटिश संसद की सहमति ज़रूरी है।


लेखक : सुनैना मूर्ती


बुलबुलों से सावधान रहें!

बुलबुलों से सावधान रहें!

पृथ्वी पर सबसे बड़े और सबसे कोमल स्तनधारियों में शामिल हंपबैक व्हेल अपने शिकार को पकड़ने के लिए एक बहुत ही अनूठे और मज़ेदार तरीके का इस्तेमाल करती हैं। क्योंकि ये व्हेल बहुत बड़ी होती हैं, लगभग 60 फीट लंबी और 4000 किलो वजन की हो सकती हैं, इसलिए इन्हें बहुत खाने की ज़रूरत होती है!

उनके भोजन का मुख्य स्रोत अन्य छोटी मछलियां हैं और व्हेल के समूह को एक साथ मछली पकड़ते हुए देखा गया है। मछुआरों की तरह व्हेल अपनी मछलियों को पकड़ने के लिए जालों का उपयोग नहीं कर सकती हैं, इसलिए वे उन बुलबुलों का उपयोग करती हैं जो वे सांस लेते समय छोड़ती हैं।

यह कैसे काम करता है?

तो, व्हेल एक समूह में एकसाथ आती हैं और पानी के नीचे एक रिंग बनाती है। एक साथ, सभी व्हेल अपने ब्लोहोल (नाक का छेद) से बुलबुले  उड़ाती हैं जिससे बुलबुलों का एक ‘जाल’ या दीवार सी बन जाती है । वे फिर धीरे-धीरे सतह की तरफ़ बढ़ती हैं, और बुलबुले के जाल के अंदर छोटी मछलियां फँस जाती हैं। यह सहयोगी व्यवहार हवाई और अलास्का के पास पाई जाने वाली व्हेल में देखा गया है और इसे बबल-नेट फ़िशिंग कहा जाता है।  विपरीत परिस्थितियों में ज़िंदा रहने के लिए जीव किस तरह खुद को बदलते हैं और नई तकनीकें इजात करते हैं इसका यह एक शानदार उदाहरण है!

 


लेखक: दिशा मीरचंदनी। दिशा एक पूर्व लॉयर हैं जो अब एक फ़्रीलांस कंटेन्ट राइटर हैं। वे फ़िटनेस प्रेमी हैं और शौकिया एरियलिस्ट हैं जो खुद का फ़ोटो-ब्लॉग लिखती हैं।

 

 


फ़ोटो: प्रेसफ़्रोम.इन्फ़ो


सिमोन बाइल्स, ब्रिगिड कोसेगी और कोको गौफ़ में क्या समानता है?

सिमोन बाइल्स, ब्रिगिड कोसेगी और कोको गौफ़ में क्या समानता है? अद्भुत महिलाएं और विश्व स्तरीय एथलीट होने के साथ ही, तीनों ने हाल ही में अविश्वसनीय विश्व रिकॉर्ड तोड़े हैं।

सिमोन बाइल्स एक ऐसी जिमनास्ट हैं जिन्होंने सिर्फ़ 22 साल की उम्र में सर्वाधिक कुल 25 विश्व पदक अपने नाम कर लिए हैं!

25 वर्षीय केन्याई मैराथन धावक ब्रिगिड कोसेगी ने 2:14:04 समय में शिकागो मैराथन (42.2 किलो मीटर/ 26 मील) पूरी करके, दौड़ जीती  और पुराने रिकॉर्ड को तोड़ दिया जो पिछले 16 वर्षों से पाउला रेडक्लिफ ने नाम था!

कोको गौफ़ सिर्फ 15 साल की है! वह हाल ही में ऑस्ट्रिया में लिंज़ में जीतकर डब्ल्यूटीए (वर्ल्ड टेनिस एसोसिएशन) चैम्पियनशिप जीतने वाली अब तक की सबसे कम उम्र की महिला बन गईं। उसने इससे पहले सिंगल और डबल दोनों श्रेणियों में जूनियर खिताब जीता है।


लेखक: दिशा मीरचंदनी। दिशा एक पूर्व लॉयर हैं जो अब एक फ़्रीलांस कंटेन्ट राइटर हैं। वे फ़िटनेस प्रेमी हैं और शौकिया एरियलिस्ट हैं जो खुद का फ़ोटो-ब्लॉग लिखती हैं।


पेश है वो तिकड़ी जिसने जीता है अर्थशास्त्र में नोबेल शांति पुरस्कार!

एक गरीब व्यक्ति वह होता है जो भोजन, कपड़े और रहने की जगह की मूलभूत आवश्यकताओं को पूरा नहीं कर सकता है। विश्व बैंक के अनुसार, दुनिया भर में 700 मिलियन से अधिक लोग गरीबी में जीते हैं।

बढ़ती अर्थव्यवस्था के रूप में, भारत ने अपनी गरीबी को लगभग आधा कर दिया है। हालांकि, इसकी 21% आबादी अभी भी राष्ट्रीय गरीबी रेखा से नीचे रहती है। इससे प्रभावी ढंग से निपटने के लिए गरीबी के कारणों को समझना महत्वपूर्ण है।

इस साल अर्थशास्त्र में नोबेल शांति पुरस्कार जीतने वालों ने ऐसा ही किया है!

इस वर्ष अर्थशास्त्र में नोबेल पुरस्कार किसने जीता? 2019 का अर्थशास्त्र का नोबेल पुरस्कार दंपति अभिजीत बनर्जी और एस्थर डुफ्लो के साथ माइकल क्रेमर को प्रदान किया गया। श्री बनर्जी और श्रीमती डुफ्लो मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (एमआईटी) में प्रोफेसर हैं। दिलचस्प बात यह है कि श्री बनर्जी भारतीय मूल के हैं और जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, दिल्ली के पूर्व छात्र हैं। श्रीमती डुफ्लो नोबेल पुरस्कार जीतने वाली दूसरी महिला और सबसे कम उम्र की व्यक्ति हैं। श्री क्रेमर वर्तमान में हार्वर्ड विश्वविद्यालय में डेवलपिंग सोसाइटीज़ के गेट्स प्रोफेसर हैं।

वे किस लिए जीते? इन शोधकर्ताओं का मानना ​​है कि गरीब लोगों को गलत समझा जाता है। वे कहते हैं कि गरीब पर या तो दया दिखाई जाती या उन्हें सराहा जाता है । उनका मानना ​​था कि गरीबों का अध्ययन करने के लिए अधिक गहन और वैज्ञानिक दृष्टिकोण आवश्यक था। इसलिए, उन्होंने अपने अध्ययन को यादृच्छिक नियंत्रित परीक्षणों के रूप में डिज़ाइन किया जो आज डिज़ाइन किए गए सबसे कड़े और सटीक शोध अध्ययन हैं। उन्होंने गरीबी में रहने वाले लोगों के जीवन के प्रत्येक पहलू का अध्ययन किया, जैसे कि वे क्या खाते हैं, कैसे वे स्वास्थ्य का प्रबंधन करते हैं और कितने बच्चों को जन्म देने का फैसला करते हैं। उनके अध्ययन के परिणामस्वरूप, यह और अधिक स्पष्ट हो गया कि कौन से प्रयासों के सफल होने की अधिक संभावना है और जो प्रयास गरीबों को गरीबी के चक्र से बाहर निकलने में मददगार होंगे।

भारत में किए गए अध्ययनों में से एक ने इस दिशा में उपचारात्मक ट्यूशन को लाभपूर्ण बताया है। उपचारात्मक ट्यूशन में छात्रों के लिए एक शिक्षण सहायक नियुक्त करना शामिल है जो उन्हें  स्कूल के बाद उन विषयों में मदद करता है जिनमें वे कमजोर हैं। ये अध्ययन बड़े पैमाने पर उन कार्यक्रमों का आधार बने जिनसे 5 मिलियन स्टूडेंट्स को  लाभ हुआ है।

उनके अपने शब्दों में, “गरीब देशों की विफलता का कारण उनकी गरीबी या उनका दुर्भाग्यपूर्ण इतिहास नहीं है”। “अज्ञानता, विचारधारा और जड़ता” से लड़ने की ज़रूरत है।


लेखक: पायल मेहता अगरवाल


इथोपिया के प्रधान मंत्री ने अपने देश और इरित्रिया के बीच शांति बनाए रखने के लिए नोबेल शांति पुरस्कार जीता।

नोबेल शांति पुरस्कार सबसे प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय पुरस्कारों में से एक है। यह हमेशा एक बड़ी चर्चा का विषय होता है कि इसके लिए किन्हें नामांकित किया जाएगा। आधिकारिक तौर पर, किसी भी नाम की घोषणा नहीं की जाती क्योंकि नामांकन गुप्त होते हैं (इसका पता केवल पुरस्कार मिलने के 50 साल बाद ही चलता है) लेकिन इसमें हमेशा किसी न किसी का पलड़ा भारी होता है। इस साल पुरस्कार जीतने के लिए जिनका नाम सामने आया वे थे:

अबी अहमद अली – अपने देश और इरित्रिया के बीच शांति बनाए रखने के लिए इथोपिया के प्रधान मंत्री।

ग्रेटा थुनबर्ग – स्वीडन से किशोर जलवायु योद्धा।

जैसिंडा अर्डर्न – क्राइस्टचर्च पर हुए हमलों के नतीजों पर किए गए उनके प्रयास के लिए न्यूजीलैंड की प्रधान मंत्री।

रावनी मेटुकटायर – अमेज़ॅन वर्षावन की रक्षा के अपने आजीवन काम के लिए ब्राजील की स्वदेशी प्रमुख।

इस दौड़ में शामिल अन्य लोग थे, हॉन्ग कॉन्ग के प्रदर्शनकारी और रिपोर्ट्स फ़ॉर बॉर्डर्स संगठन।

आख़िरकार, विजेता अबी अहमद अली बने। 2018 में सत्ता में आने के बाद, वह इरित्रिया के साथ शांति वार्ता को फिर से शुरू करने पर ध्यान दे रहे थे। उनके बीच काफ़ी लंबे समय से युद्ध चल रहा था [यहाँ पढ़िए उसका इतिहास]

शांति समझौता सफ़ल होने का एक महत्वपूर्ण कारण, अबी अहमद का 2002 में एक अंतरराष्ट्रीय सीमा आयोग के शासन पर बिना किसी शर्त के स्वीकृति देना था। अबी अहमद और इरीत्रिया के राष्ट्रपति, इसाइयस अफवर्की दोनों ने पिछले साल दोनों देशों के बीच शांति की घोषणा की और व्यापार और मैत्रीपूर्ण संबंधों को बढ़ावा दिया।

अबी अहमद ने देश की आपातकालीन स्थिति को भी बढ़ावा दिया, मीडिया सेंसरशिप को बंद कर दिया, राजनीतिक कैदियों को स्वतंत्रता दी और नागरिक और सामुदायिक जीवन में महिलाओं की रूपरेखा को उभारा।

उन्होंने अफ्रीका में अन्य देशों के बीच शांति लाने में भी मदद की है, उदाहरण के लिए इरित्रिया और जिबूती के बीच और केन्या और सोमालिया के मतभेदों को सुलझाने की कोशिश की।


लेखक: पेरीना लांबा। पेरीना एक फ्रीलांस लेखक, संपादक और रचनात्मक सलाहकार हैं। वे टोटली मुंबई की सह-लेखिका भी हैं।