हाँग काँग में क्या चल रहा है?

एडिटोरियल क्रेडिट: / शटरस्टॉक.कॉम कॉव्लून, हॉंग कॉंगमें – 17 नवंबर, 2019: एक प्रदर्शन के दौरान पॉलिटेक्निक विश्वविद्यालय में एक ऊपरी वॉकवे के दृश्य को अवरुद्ध करने के लिए छतरियों का उपयोग किया गया

जून 2019 से हॉंग कॉंग में विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। यह तब शुरू हुआ जब सरकार ने हॉंग कॉंग के अपराधियों  को मुख्य भूमि चीन  (मेन लैंड चाइना) भेजने या प्रत्यर्पित करने का अत्यधिक विवादास्पद नियम लाने की कोशिश की। हालांकि सरकार ने फैसला वापस ले लिया, पर पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प पांच महीने बाद भी जारी है, और वे हिंसक हो गए हैं।

हॉंग कॉंग के लोग अब पुलिस की बर्बरता और हॉंग कॉंग को बीजिंग द्वारा जिस तरह नियंत्रित किया जा रहा है उसका विरोध कर रहे हैं । विरोध बड़े स्तर पर सार्वजनिक समर्थन के साथ बढ़ रहा है।

स्कूल और शिक्षा परिसरों को हिंसा से मुक्त रखा गया है, लेकिन पिछले सप्ताह 2 बड़े परिसरों में हिंसक प्रदर्शनों की लहर देखी गई।

कई हाई स्कूल के छात्रों सहित सैकड़ों प्रदर्शनकारी, हॉंग कॉंग में पॉलिटेक्निक यूनिवर्सिटी (पॉलीयू) परिसर के अंदर जमा हुए। रविवार को हुआ यह प्रदर्शन पिछले 5 महीनों के कुछ सबसे गंभीर विरोध प्रदर्शनों में से एक था। सैकड़ों प्रदर्शनकारियों ने धनुष और तीर सहित देसी हथियारों का उपयोग करके परिसर में घुसने की कोशिश कर रहे पुलिसवालों से झड़प की।

 

जवाबी कार्यवाही में, पुलिस ने विश्वविद्यालय को घेर लिया और सभी को अपने हथियारों को छोडने, अपने गैस मास्क को हटाने और वहाँ से जाने का आदेश दिया। कुछ प्रदर्शनकारियों ने बचने की उम्मीद की, और अन्य समर्थकों से मदद मांग रहे थे क्योंकि उन्हें डर था कि उन्हें दंगा करने के लिए गिरफ्तार किया जाएगा।

 

प्रदर्शनकारी कब रुकेंगे? अर्ध-स्वतंत्र चीनी क्षेत्र में विरोध के पीछे के इतिहास के बारे में अधिक पढ़ने के लिए, यहाँ क्लिक करें


इस हफ़्ते की 5 बड़ी ख़बरें!

चिली में विरोध प्रदर्शन: सरकार के खिलाफ़ विरोध करने वाले देशों में हाल ही में चिली का नाम भी जुड़ गया है। इस देश के नागरिक राजनीतिक और आर्थिक स्थिरता की मांग को लेकर

सड़कों पर उतर गए हैं। सरकार ने चिली की राजधानी सैंटियागो में मेट्रो के किराए में वृद्धि की घोषणा की। ऐसा लगता है कि इसने लोगों के सब्र का बांध तोड़ दिया और पूरे चिली में भारी विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया। नागरिक सामानों की उच्च कीमत, कम वेतन, लोगों की कमाई के मामले में असमानता, और स्वास्थ्य सेवा और शिक्षा जैसे अन्य मुद्दों के साथ ही बुज़ुर्गों के लिए सेवानिवृत्ति की खराब योजना और जीवन की गुणवत्ता जैसे मामलों को लेकर विरोध कर रहे हैं। दुनिया भर के कई देशों में लोग सरकार के खिलाफ आवाज़ उठा रहे हैं और बेहतर जीवन की माँग कर रहे हैं।

 

अमेरिका पेरिस समझौते से बाहर हो गया: अमेरिकी राष्ट्रपति, डोनाल्ड ट्रम्प ने संयुक्त राष्ट्र को औपचारिक रूप से सूचित किया है कि अमेरिका, जलवायु परिवर्तन से जुड़े पेरिस समझौते से हट जाएगा। इसका मतलब है कि कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में दुनिया के सबसे बड़े योगदानकर्ताओं में से एक की सरकार ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को कम करने और वैश्विक तापमान में वृद्धि को 2 डिग्री सेल्सियस के अंदर रखने के वैश्विक प्रयासों का हिस्सा नहीं होगी!

 

गूगल का फिटबिट  खरीदना: गूगल ने कंपनी फिटबिट को 2 बिलियन डॉलर में खरीदने के साथ स्मार्टवॉच बाजार में बड़ी छलांग लगाई है। गूगल को इससे क्या मिलेगा? फिटबिट का मार्केटशेयर, और अपने स्मार्टफ़ोन ऑपरेटिंग सिस्टम वेयरओएस के लिए एक अच्छा हार्डवेयर प्लेटफ़ॉर्म । फिटबिट को इससे क्या मिलेगा? शायद बेहतर सॉफ्टवेयर और बेहतर तकनीक, खुद इसे विकसित करने से ज़्यादा जल्दी

 

कोल्डप्ले एक नया एल्बम रिलीज़ कर रहा है! इनका नया एल्बम एवरीडे लाइफ़  दुनिया भर के अलगअलग लोगों के जीवन, और सबके उतारचढ़ाव से प्रेरित है। ये लोग किसी भी नस्ल, जातीयता, नागरिकता के हो सकते हैं। कोल्डप्ले ने इस एल्बम के अब तक 3 गाने रिलीज़ किए हैं, और 22 नवंबर 2019 को जॉर्डन के एल्बम के सभी गीतों का लाइव प्रदर्शन किया जाएगा।

रग्बी विश्व कप:
दक्षिण अफ्रीकी की पुरुषों की रग्बी टीम, स्प्रिंगबोक्स ने इंग्लैंड को हराकर अपना तीसरा विश्व कप खिताब जीता! जापान में आयोजित इस टूर्नामेंट में 20 टीमों ने भाग लिया, और जापान इसमें  भाग लेने वाली एकमात्र एशियाई टीम थी। महिलाओं का रग्बी विश्व कप 2021 में न्यूज़ीलैंड में आयोजित किया जाएगा।


गूगल ने घोषणा की कि वह लोकप्रिय स्मार्टवॉच कंपनी फिटबिट को 2.1 बिलियन डॉलर में खरीदेगा

गूगल ने 2.1 बिलियन डॉलर के नकद सौदे के साथ फिटबिट  नामक लोकप्रिय स्मार्टवॉच कंपनी का अधिग्रहण करने  की घोषणा की।

फिटबिट  क्यों है खास?

फिटबिट एक कंपनी है जो पहनने योग्य तकनीक विकसित करती है। इसने मूल रूप से कम लागत वाले बैंड बनाए जो आपके चलने या दौड़ने की दूरी के साथ फिटनेस स्तर को ट्रैक करता  है। पिछले कुछ वर्षों में, इसने अपने उत्पाद को स्मार्टवॉच के विभिन्न मॉडलों के रूप में विकसित किया है। फिटबिट ने अपनी घड़ियों (हार्डवेयर) के लिए अद्वितीय डिजाइन के साथ-साथ सुपर फिटनेस ट्रैकिंग क्षमता वाले मोबाइल ऐप, सोशल नेटवर्क, स्लीप ट्रैकिंग, सब्सक्रिप्शन कोचिंग (सॉफ्टवेयर) विकसित किए हैं, जिसने इसे फिटनेस वेरबल के क्षेत्र में अलग पहचान दिलाई है।

स्मार्टवॉच क्या है?

स्मार्टवॉच एक ऐसी घड़ी है जो आपको सिर्फ समय नहीं बताती बल्कि उससे कई ज्यादा काम की है। यह आपके फिटनेस स्तर (आप कितने कदम चलते हैं, हृदय गति, नींद का पैटर्न) को ट्रैक कर सकती है, मैसेज का जवाब दे सकती है और कॉल ले सकती है, आपके स्मार्ट सहायक के साथ बातचीत कर सकती है, दिशा बताते में मदद कर सकती है, इसके ज़रिए आप अपना म्यूज़िक ऐक्सेस कर सकते हैं।स्मार्टवॉच उद्योग एक बहुत ही लाभदायक उद्योग है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक  2019 में स्मार्टवॉच की बिक्री से कुल राजस्व 11 बिलियन डॉलर  होने की उम्मीद है, और 2024 तक यह 37 बिलियन डॉलर तक बढ़ने का अनुमान है। यह बहुत अच्छा है!
वर्तमान में, ऐप्पल वॉच और सैमसंग की गैलेक्सी इस मार्केट में सबसे आगे हैं। 2019 की दूसरी तिमाही में ऐप्पल ने 46.8% बाजार हिस्सेदारी (मार्केट शेयर) दर्ज की, जबकि फिटबिट बेची गई घड़ियों की संख्या के मामले में 9.8% पर आ गई। बाजार हिस्सेदारी क्या है? मार्केट शेयर का मतलब है कि एक उत्पाद का संबन्धित बाज़ार पर कितना कब्जा है। उदाहरण के लिए, यदि एक वर्ष में 100 स्मार्टवॉच बिकी हैं, और उस वर्ष ऐप्पल की 46.8 घड़ियाँ बिकी हैं, तो उस वर्ष ऐप्पल की बाजार हिस्सेदारी 46.8% है।
गूगल द्वारा खरीदे जाना फिटबिट के लिए सही क्यों है? फिटबिट लंबे समय से एक्टिविटी-हेल्थ ट्रैकिंग वेरबल में अग्रणी थी, लेकिन पिछले तीन वर्षों में इसकी बाजार हिस्सेदारी में गिरावट आई है। इस सौदे के साथ, फिटबिट को गूगल के सॉफ़्टवेयर तक पहुंच मिलेगी और वह अपने ऐप स्टोर का विस्तार करने में सक्षम होगा। यह स्वास्थ्य उत्पाद श्रेणी में बेहतर उत्पाद पेश करने में सक्षम होगा।

गूगल फिटबिट क्यों खरीदना चाहता है? गूगल के पास घड़ी के लिए वेयरओएस नाम का एक ऑपरेटिंग सिस्टम है जिसे अन्य स्मार्टवॉच ब्रांडों के हार्डवेयर में उपयोग किया जाता है, जैसे कि फॉसिल और एम्पोरियो अरमानी, लेकिन उनके पास अपने ब्रांडेड वेरबल्स नहीं हैं। गूगल अपनी स्मार्टवॉच और फिटनेस हार्डवेयर का निर्माण करना चाहता है और फिटबिट की विशेषज्ञता और हार्डवेयर क्षमताएं उन्हें इसमें मदद करेंगी!

इसके अलावा, फिटबिट के 28 मिलियन सक्रिय उपयोगकर्ता हैं जो अपने स्मार्टवॉच से स्टेप्स, हार्ट-रेट, स्लीप रीडिंग, लोकेशन और बहुत कुछ सिंक कर रहे हैं। कंपनी के पास लोगों के निजी जीवन पर बहुत सारे सार्थक आंकड़े हैं। यह इस सौदे का सबसे ज़रूरी हिस्सा हो सकता है। इस डेटा का उपयोग विज्ञापन के लिए किया जा सकता है? आपके गूगल खोज परिणामों को प्रभावित करने के लिए? नए स्वास्थ्य उत्पादों का निर्माण करने के लिए? हालांकि गूगल ने स्पष्ट किया है कि फिटबिट हेल्थ और वेलनेस डेटा का उपयोग गूगल विज्ञापनों के लिए नहीं किया जाएगा और फिटबिट ने वादा किया है कि उनके उपयोगकर्ता का डेटा निजी रहेगा। यह तो समय ही बताएगा।इस नई साझेदारी के नए उत्पाद देखने के लिए हम बेसब्र हैं।

 


अमेरिका का इरादा है औपचारिक रूप से जलवायु परिवर्तन से जुड़े पेरिस समझौते से पीछे हटने का

क्रेडिट: पीस पैलेस लाइब्रेरी
जलवायु परिवर्तन से जुड़े पेरिस समझौते पर 2016 में सहमति व्यक्त की गई थी और 2016 में 197 देशों द्वारा हस्ताक्षर किए गए थे। इसका उद्देश्य 21 वीं शताब्दी के अंत तक वैश्विक तापमान की वृद्धि को 2 डिग्री सेल्सियस से नीचे, आदर्श रूप से 1.5 डिग्री सेल्सियस तक बनाए रखना है। यह उद्देश्य तभी पूरा हो पाएगा जब हस्ताक्षर  करने वाले सभी 197 देश अपनी आदतों में व्यापक बदलाव और ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को कम करने के लिए प्रयास करेंगे । समाचार: जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प सत्ता में आए, तो उन्होंने इस समझौते में अमेरिका की भागीदारी का विरोध किया। इस हफ्ते, उन्होंने औपचारिक रूप से संयुक्त राष्ट्र को अमेरिका के इस ऐतिहासिक समझौते से हटने के इरादे के बारे में कहा है।
वे ऐसा क्यों कर रहे हैं? उनका मानना ​​है कि अगर उनके देश को ऊर्जा के पारंपरिक स्रोतों, जैसे कोयला और जीवाश्म ईंधन से दूर रहने के लिए मजबूर किया जाता है तो अमेरिकी कंपनियों पर बहुत अधिक नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।
इससे क्या फ़र्क पड़ता है? यह चिंताजनक है क्योंकि कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन के मामले में संयुक्त राज्य अमेरिका दुनिया के सबसे बड़े प्रदूषकों में से एक है।
अब क्या  होगा? अमेरिकी सरकार एक साल के भीतर समझौते से पीछे हट जाएगी, यदि 2020 में एक नया अमेरिकी राष्ट्रपति नहीं चुना जाता है, जो इस फैसले को पलट सकता है। इस चुनाव पर बहुत कुछ निर्भर  है!
इसके अलावा, कई अमेरिकी व्यवसाई, पर्यावरणविद और अन्य नेता अभी भी ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को कम करने के लिए प्रतिबद्ध हैं, और ऐसा करने के लिए वे अपने तरीकों को बदलने और जागरूकता बढ़ाने और अधिक कंपनियों और व्यवसायों को इसके लिए तैयार करने के लिए प्रयास कर रहे हैं।
अन्य देश जो इस समझौते का हिस्सा हैं, इस बीच, वैकल्पिक योजना बना रहे हैं जिन्हें अमेरिका की भागीदारी की ज़रूरत नहीं है। इसका मतलब यह है कि इस समझौते पर हस्ताक्षर करने वाले बाकी देश ग्लोबल वार्मिंग को रोकने के लिए अधिक बोझ महसूस करेंगे।
आगे क्या होता है यह देखने के लिए हमारे साथ बने रहिए।


लेखक: सुनैना मूर्ती


रेड एलर्ट! दिल्ली भयानक वायु प्रदूषण का सामना कर रही है

क्रेडिट: इंडिया टुगेथर

खतरनाक वायु प्रदूषण की चेतावनी! सोमवार 4 नवंबर को, भारत की राजधानी नई दिल्ली में एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई- वायु गुणवत्ता सूचकांक) 604 पर पहुंच गया!

 

इसका क्या मतलब है? वायु गुणवत्ता सूचकांक(एक्यूआई) वायु प्रदूषण का एक माप है। चार्ट 500 तक जाता है। ये जितना नीचे हो मतलब हवाउतनी ही साफ़ है। 100 से अधिक जितना भी हो, मतलब लोगों के लिए खतरनाक हो सकता है।

सरकारी एजेंसियां ​​यह बताने के लिए एक्यूआई का उपयोग करती हैं कि वर्तमान में वायु कितनी प्रदूषित है।

जैसे ही एक्यूआई बढ़ता है, अधिक लोगों के स्वास्थ्य पर प्रभाव होने की संभावना होती है।

नई दिल्ली में इतनी खराब हवा क्यों है?

शहर और आस-पास के इलाकों को घने जहरीले स्मॉग ने घेर लिया है। यह स्मॉग जहरीले कणों और धूल की एक परत है, जिससे कई स्थानों पर कुछ भी दिखाई नहीं दे रहा है। ये कण विशेष रूप से चिंताजनक हैं क्योंकि ये फेफड़े और रक्त टिसू में प्रवेश करने में सक्षम होते हैं और गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बनते हैं। लोग पड़ोसी राज्यों में फसलों को जलाना, औद्योगिक और वाहन से हो रही जहरीली गैस के उत्सर्जन को इसके लिए दोषी मानते हैं।

इस शहर के 25 मिलियन लोगों को अक्सर सांस लेने वाली प्रदूषित हवा से निपटना पड़ता है। लेकिन जैसे-जैसे सर्दी का मौसम आता है, वैसे-वैसे समस्या और भी बदतर होती जाती है। गर्म हवा ऊपर उठ जाती है, और ठंडी हवा घनी होती है और नीचे उतरती है। दिल्ली में सर्दियों के दौरान धीमी हवाएं और ठंडा तापमान प्रदूषित हवा को ऊपर नहीं जाने देते हैं और इस क्षेत्र को छोड़ने

नहीं देते हैं। इसी की वजह से वास्तव में हवा में घुलने वाले प्रदूषक ज़मीन के करीब आ गए हैं और शहर को एक जहरीले कंबल की तरह ढंक रखा है।

ज़रा रुकिए: क्या हमने यह पहले भी सुना है? हाँ, हमने पिछले साल भी इस समय इसके बारे में  लिखा था। अरविंद केजरीवाल यहाँ के मुख्यमंत्री हैं। वे कहते हैं कि वे इस समस्या का हल खोजने के लिए दृढ़ हैं, और पड़ोसी राज्यों के नेताओं के साथ मिलकर इस विषैले मुद्दे का समाधान खोजेंगे। उनकी एक पहल उनकी विषम-सम (ऑड-ईवन) योजना को बहाल करना है, जिसके तहत जिनकी कार के लाइसेंस प्लेट पर अंतिम संख्या विषम है वे महीने के विषम संख्या वाले दिनों में ही अपनी कारों का उपयोग करेंगे, और सम संख्या वाले लोग इस दिन अपनी कारें सड़क पर ना उतारें । वे कार पूलिंग को प्रोत्साहित करके कम हानिकारक गैसों का उत्सर्जन करने के लिए सड़क पर कारों की संख्या कम करने की कोशिश कर रहे हैं।

अन्य नियमों के अंतर्गत लोगों को कचरा जलाने से रोकना है, और निर्माण गतिविधियों को सीमित करना है।

हमें उम्मीद है कि सर्दियों के आने तक नई दिल्ली में स्थिति बेहतर हो जाए, और यह कि नेता एकसाथ आकर कुछ स्थायी समाधान ले आएं।


एक्यूआई क्ष्रेणी    इससे स्वास्थ पर होने वाले प्रभाव

अच्छी (0-50)- न्यूनतम प्रभाव

संतोषजनक (51-100) – संवेदनशील लोगों के लिए थोड़ी सांस की तकलीफ़

मध्यम स्तर पर दूषित (101-200) अस्थमा जैसी फेफड़ों से जुड़ी बीमारियों के मरीज को सांस लेने में परेशानी और हृदय रोग के मरीज़ों को भी परेशानी हो सकती है

खराब (201-300)- ज़्यादा लंबे समय तक इसके संपर्क में रहने वाले लोगों और हृदय रोग के मरीज़ों को सांस लेने में परेशानी हो सकती है

बहुत खराब (301-400)- ज़्यादा लंबे समय तक इसके संपर्क में रहने वाले लोगों के लिए सांस की समस्या हो सकती है । फेफड़ों से जुड़ी बीमारियों के मरीज और हृदय रोग के मरीज़ों को ज़्यादा खतरा।

गंभीर (401-500)- स्वस्थ लोगों को सांस की तकलीफ़ और फेफड़ों/ हृदय रोग के मरीज़ों  को गंभीर स्वास्थ  समस्याएं हो सकती है।  ये स्वास्थ समस्याएं हल्की-फुल्की शारीरिक गतिविधियों के दौरान भी अनुभव हो सकती है।

 


दुनिया के सबसे ऊँचे स्वर वाले पक्षी से मिलिए जिसका नाम है, सफ़ेद बेलबर्ड

एक नर सफ़ेद बेलबर्ड संभोग के लिए पुकारता है। पक्षी एक काले वॉटल का विस्तार करके अपने प्रणय-निवेदन को बढ़ाता है, जो उसके जबड़े से निकलता है।
  एंसल्मो डी अफोंसेका द्वारा ली गई तस्वीर

वह आकार में भले ही छोटा हो सकता है लेकिन यह पक्षी निश्चित रूप से अपनी आवाज़ पहुँचाना जानता है! करंट बायोलॉजी मैगज़ीन में हाल ही में प्रकाशित एक पेपर के अनुसार, इस सफ़ेद बेलबर्ड पक्षी की प्रजाति वर्तमान में दुनिया की सबसे ऊँचे स्वर वाली ज्ञात पक्षियों की प्रजाति है।

अमेज़न में पाए जाने वाला यह सफ़ेद बेलबर्ड (प्रोक्नीस एल्बस) मादा बेलबर्ड्स को आकर्षित करने के लिए अपनी तेज़ आवाज़ का उपयोग करता है – जितनी ज़ोर से वह चिल्लाएगा, उसके साथी मिलने की संभावना               उतनी ही ज़्यादा होगी।

जहाँ नर का कोट सफ़ेद और इसकी चोंच के पास लंबे धागे जैसी संरचना होती है, मादा पक्षी पीले और हरे रंग का मिश्रण होती है और ज़्यादा आवाज नहीं करती!

आश्चर्य की बात है कि कितनी तेज़ आवाज़? सफ़ेद बेलबर्ड के दो प्रकार के ‘गीत स्तर’ होते हैं – सामान्य स्तर 116 डीबी (डेसीबल) होता है जबकि अधिक प्रभावशाली स्तर 125 डीबी तक जाता है। संदर्भ के लिए, सामान्य मानव की आवाज का स्तर 50 से 65 डीबी के बीच होता है और एक ज़ोरदार रॉक कॉन्सर्ट की आवाज़ 120 डीबी के आसपास होती है।

दिलचस्प बात यह है कि जब मादा पक्षी करीब होती है तो नर ज़ोरदार आवाज़ का उपयोग करता है, जबकि अन्य जीव आमतौर पर दूर बैठे जीवों को संकेत देने के लिए ऊँची आवाज़ का उपयोग करते हैं।

दो गाने सुनने के लिए इस वीडियो पर एक नजर डालें।

क्या आपको पता था? द स्क्रीमिंग पीहा ने 116 डीबी पर दुनिया की सबसे ऊँचे स्वर वाली पक्षी होने का रिकॉर्ड कायम किया था जब तक कि उसके कज़िन सफ़ेद बेलबर्ड ने उससे यह रिकॉर्ड छीन नहीं लिया!


लेखक: प्रीतिका सोनी। प्रीतिका एक बच्चे की माँ हैं। खाली समय में उन्हें लिखना, फ़ोटोग्राफ़ी करना और कढ़ाई करना पसंद है। उन्होंने एनडीटीवी, मुंबई के साथ काम किया है और एससीएमसोफ़िया में पढ़ाया है।


कोई पहाड़ इतना ऊँचा नहीं!

कोई पहाड़ इतना ऊँचा नहीं!

निर्मल पुरजा, एक ऐसे नेपाली नागरिक जो पहले ब्रिटिश सेना में काम कर चुके हैं ने सिर्फ़ 189 दिनों में दुनिया के सबसे ऊँचे 14 पहाड़ों पर चढ़कर पहाड़ों की चढ़ाई का रिकॉर्ड तोड़ दिया है!

बस कुछ पर्वतारोही, सिर्फ 40! इस उपलब्धि को हासिल कर पाए। पहले थे, रेनॉल्ड मेसनर जिन्होंने 1986 में 8000 मीटर से भी अधिक की चढ़ाई की। 2010 में, एडुर्ने पासबान इस चुनौती को पूरा करने वाली पहली महिला बनीं।

हिमालय की सभी 14 ऊँची चोटियों पर चढ़ने का पिछला रिकॉर्ड दक्षिण कोरिया के किम चांग-हो के नाम था, जिन्होंने सभी 14 पहाड़ों पर चढ़ाई करने में कुल 7 साल, 11 महीने और 14 दिन का समय लिया था।

निर्मल ने सिर्फ़ 6 महीने में चढ़ाई पूरी करके इस रिकॉर्ड को 7 साल से भी अधिक समयसीमा से तोड़ा! इससे ज़्यादा अच्छी बात क्या हो सकती है कि उन्होंने माउंट एवरेस्ट, ल्होत्से और मकालू (जो दुनिया के चौथे और पाँचवे उच्चतम पहाड़ हैं) की चढ़ाई सिर्फ़ दो दिन में की!

निर्मल ने नांगा परबत (8125 मीटर), के2 (8614 मीटर), ब्रॉड पीक (8051 मीटर), गाशरब्रुम 1 (8080 मीटर), गाशरब्रुम 2 (8035 मीटर), अन्नपूर्णा (8091 मीटर), शीशपंगमा (8027 मीटर), चोयु (8188 मीटर), कंचनजंघा (8586 मीटर), मकालू (8485 मीटर), मनास्लु (8163 मीटर), धौलागिरी 1 (8167 मीटर), ल्होत्से (8516 मीटर) और एवरेस्ट (8848 मीटर) की चढ़ाई की है!

इस शानदार उपलब्धि को हासिल करने के लिए निर्मल पुरजा को बधाई!


चिड़ियाघर में आया एक नया जीव, मिलिए ब्लॉब से

“द ब्लॉब”, स्लाइम की परत (फाइज़रम पॉलीसिफ़लम), एक एकल-कोशिका वाला जीव जो पेड़ के तने पर फ़ैल रहा है जिसकी 16 अक्टूबर, 2019 को फ्रांस के पेरिस शहर के एक प्राणि उद्यान में प्रेस पूर्वावलोकन के दौरान तस्वीर ली गई। (तस्वीर: रॉयटर्स/बेनॉइट टेसियर) यहाँ और पढ़िए Https://www.channelnewsasia.com/news/world/no-brain-blob-paris-zoo-12007002

एक ऐसा जीवित प्राणी जिसके पैर नहीं हैं लेकिन फिर भी चल सकता है? मुँह नहीं है पर खा सकता है। दिमाग नहीं है पर सीख सकता है। वह नीयन पीले रंग का छोटा प्राणी बिल्कुल खेलने वाले स्लाइम या कीचड़ की तरह दिखता है। नहीं समझे? खैर, चलिए आपको ब्लॉब के बारे में बताते हैं! (मुझे भी नहीं पता!)

 

हाल ही में, पेरिस के चिड़ियाघर में एक नया निवासी पाया गया – एक स्लाइम जिसे फाइज़रम पॉलीसिफ़लम, उर्फ ​​द ब्लॉब के रूप में जाना जाता है। यह कोई जानवर या पौधा या कोई कवक नहीं है तो शायद यह अमीबज़ा की प्रजाती है। भले ही वे लगभग लाखों साल से हमारे आसपास पाए जा रहे हैं, लेकिन अब इसकी करीब से जाँच करने पर वैज्ञानिक और जनता इससे मोहित हो गए हैं!

 वह शीर्ष 5 बातें जो आपको ब्लॉब के बारे में पता होनी चाहिए

  1. इस छोटे से जीवित प्राणी के अंदर एक बड़ी कोशिका है जिसमें अरबों नाभिक हैं ! (आपकी जानकारी के लिए: मानव शरीर में लगभग 37.2 ट्रिलियन कोशिकाएँ हैं!)
  2. द ब्लॉब को बैक्टीरिया, कवक और खमीर जैसी चीज़ें खाना पसंद  है और ये पेड़ों की छाँव के पास के बगीचों या जंगलों में पाए जाते हैं।
  3. एक ब्लॉब में लगभग 720 लिंग होते हैं – वे प्रजनन करते समय बीजाणुओं को छोड़ देते हैं और जब 2 अलग-अलग जीन के बीजाणु मिलते हैं, तो एक नए ब्लॉब का जन्म होता है।
  4. अगर आप इसे आधा काट दें तो ब्लॉब 2 मिनट के भीतर ही ठीक हो सकता है। जैसे कोई सुपर हीरो!
  5. भले ही इसके पास दिमाग या तंत्रिका प्रणाली नहीं है लेकिन ब्लॉब चीज़ें सीख और याद रख सकता है। वैज्ञानिकों ने इसके साथ प्रयोग किया और देखा कि ये भूलभुलैया की समस्याओं को हल कर सकता है, यहाँ तक ​​कि नक्शे पर दो शहरों के बीच का सबसे छोटे मार्ग भी ढूँढ सकता है।

सबसे अच्छी बात यह है कि दो अलग-अलग ब्लॉब सीखी हुई बातों का एक-दूसरे के साथ आदान-प्रदान कर सकते हैं!

क्या तुम्हें पता था? इस स्लाइम का नाम 1958 में आई साई-फाई फ़िल्म के नाम पर रखा गया है जिसमें ‘द ब्लॉब’ एक जीवित एलियन है जो अपने रास्ते में आने वाली हर चीज़ को नष्ट कर देता है!

सौभाग्य से, हमारे ब्लॉब ने अभी तक विनाशकारी होने का कोई संकेत नहीं दिया है और लगता है कि अपने अन्य ‘जीवित साथियों’ के साथ वह ख़ुशी-ख़ुशी रह रहा है!


लेखक: प्रीतिका सोनी। प्रीतिका एक बच्चे की माँ हैं। खाली समय में, उन्हें लिखना, फ़ोटोग्राफ़ी करना और कढ़ाई करना पसंद है। उन्होंने एनडीटीवी, मुंबई के साथ काम किया है और एससीएमसोफ़िया में पढ़ाया है।


जापानी शेफ़ हिरोशी कुरोदा ने दुनिया का सबसे लंबा नूडल बनाने के लिए गिनीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड तोड़ा!

अब हमने सब कुछ देख लिया है!

जाने-माने जापानी शेफ़ हिरोशी कुरोदा ने दुनिया का सबसे लंबा नूडल बनाने के लिए गिनीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड तोड़ा!

ये सच है! शेफ़ कुरोदा ने बड़ी मेहनत से एक नूडल बनाने के लिए हाथ से खींचने वाले नूडल्स की पारंपरिक विधि का उपयोग करते हुए आटे के टुकड़े को घुमाकर, खींचकर पटका जिसका माप 183.72 मी (602 फीट 9 इंच) था जो वास्तव में वाशिंगटन डीसी के एक बहुत लंबे वाशिंगटन स्मारक से 14 मीटर लंबा है!

रुको, क्या?!

शेफ़ हिरोशी कुरोदा लंबे समय से खाना पकाने में संख्या और माप के उपयोग से प्रसन्न हैं क्योंकि उनका मानना ​​है कि सामग्री का सही संयोजन और अनुपात एक स्वादिष्ट पकवान की कुंजी है।

इस नए (और थोड़े विचित्र) रिकॉर्ड को तोड़ने के लिए, शेफ़ कुरोदा ने तिल के तेल में भिगोए हुए आटे का उपयोग करते हुए एक उग्र गर्म कड़ाही के सामने काम किया। तिल के तेल के इस्तेमाल से आटा थोड़ा मज़बूत हो जाता है, जो इसे तड़कने या टूटने से रोकता है क्योंकि इसे लंबा और पतला करने के लिए खींचा जाता है।

पारंपरिक हस्तनिर्मित नूडल्स को गूंथने, फ़ैलाने, खींचने और एक गर्म कड़ाही में आटे को डालने की नाज़ुक संतुलित प्रक्रिया से बनाया जाता है, और शेफ़ कुरोदा ने इतिहास में अपनी जगह बनाने वाले इस नूडल को बनाने में एक घंटे से अधिक का समय लगाया!

यह शेफ़ हिरोशी कुरोदा का पहला रिकॉर्ड तोड़ने वाला व्यंजन नहीं है और उन्होंने तीन मिनट (9) में तैयार किए गए नूडल भागों की सबसे अधिक संख्या, सबसे पतले हस्तनिर्मित चीनी नूडल (0.22 मिमी / 0.0866 इंच) और एक मिनट (65,536) में सबसे अधिक संख्या में नूडल बनाने का रिकॉर्ड अपने नाम किया है!


लेखक: दिशा मीरचंदानी। दिशा एक पूर्व वकील हैं जो फ़िलहाल एक फ्रीलांस कंटेंट राइटर हैं। उनका ख़ुद का फिटनेस फोटो-ब्लॉग होने के साथ-साथ वे फिटनेस फ्रिक और शौकिया एरियलिस्ट भी हैं।


अंतरिक्ष कबाड़: यह कहाँ से आता है और कहाँ जाता है

पृथ्वी एक व्यस्त, हलचल भरा स्थान है जो तेजी से प्रदूषित और अस्वच्छ हो रहा है। ऐसा लगता है जैसे हम ख़ुद की भी मदद नहीं कर सकते हैं, और साथ ही कूड़ा फ़ैलाकर अंतरिक्ष को भी प्रदूषित कर रहे हैं।

अंतरिक्ष कबाड़ क्या है?

अंतरिक्ष कबाड़ अंतरिक्ष मलबे हैं – बिट्स, पुराने उपग्रहों के टुकड़े, धातु, और कुछ बूस्टर रॉकेट के खोल। यह सभी प्रकार और आकार के आते हैं, और 23,300 मील प्रति घंटे से भी अधिक की गति से चलते हैं!

नेशनल जियोग्राफ़िक का कहना है कि वर्तमान में पृथ्वी की परिक्रमा 0.4 से 4 इंच के बीच अंतरिक्ष कबाड़ के 500,000 से अधिक टुकड़े कर रहे हैं। इसके अलावा लगभग 23,000 टुकड़े 4 इंच से अधिक बड़े हैं। ये उपग्रहों और अंतरिक्ष स्टेशन को नुकसान पहुँचा सकते हैं क्योंकि वे इतनी तेज़ गति से चलते हैं।

अंतरिक्ष कबाड़ कहाँ से आता है? हमने अंतरिक्ष में कई उपग्रह और रॉकेट लॉन्च किए हैं। क्या होता है रॉकेट लॉन्च के उपयोग किए हुए हिस्से, बर्बाद या क्षतिग्रस्त उपग्रह, या विभिन्न ग्रहों का अध्ययन करने के लिए भेजे जाने वाले मिशनों का जब वे एक बार जितनी तस्वीर ले सकते हैं ले लेते हैं और अंतरिक्ष में अपना पर्याप्त समय पूरा कर लेते हैं? ऐसे उपकरण जो अंतरिक्ष यात्रियों के हाथों से छूट जाते हैं या जहाज के कुछ हिस्से जो अंतरिक्ष में घूम रही दूसरी चीज़ों के कारण टूट जाते हैं ऐसी छोटी-छोटी चीज़ों का क्या होता है? वह सब कहाँ जाता है? इनमें से बहुत सी चीज़ें पृथ्वी के निकट घूमती रहती है। इसमें से कुछ पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करके जल जाते हैं, लेकिन ज़्यादातर अंतरिक्ष में इधर-उधर घूमकर दूसरे कबाड़ से टकराकर और अधिक मलबा बना रहे हैं।

साभार: Phys.org

कभी-कभी, जहाजों को वापस लाकर एक अंतरिक्षयान के कबाड़खाने में डाल दिया जाता है, जो प्वाइंट निमो में प्रशांत महासागर के निचले भाग में स्थित है यह मानव सभ्यता से बहुत दूर है। तो इससे यह पता चला है कि हम अंतरिक्ष में और साथ ही महासागर के निचले हिस्से में भी कबाड़ फ़ैला रहे हैं!

 

एक सेकंड रुको क्या पुराने उपग्रहों में से किसी की भी पुनरावृति नहीं की जा सकती?

अमेरिका की डिफेंस एडवांस्ड रिसर्च प्रोजेक्ट्स एजेंसी (डारपा) गैर-कार्यात्मक उपग्रहों के कुछ हिस्सों की पुनरावृति करने और उन्हें उपयोगी बनाने का प्रयास कर रही है। प्रोजेक्ट फीनिक्स रोबोट का उपयोग पृथ्वी में घूम रहे पुराने उपग्रहों से एंटीना को निकालकर उन्हें अन्य उपग्रहों में जोड़ने के लिए कर रहा है। ख़राब उपग्रहों के कार्यात्मक हिस्सों का उपयोग करके, अंतरिक्ष कबाड़ एक प्रमुख अंतरिक्ष संसाधन बन सकता है।

क्या पृथ्वी के आसपास से अंतरिक्ष कबाड़ को हटाने के लिए कोई अन्य प्रयास नहीं किए जा रहे हैं? हाँ, विभिन्न तरीकों का परीक्षण किया जा रहा है, लेकिन अभी तक कोई ठोस तरीका हाथ नहीं लगा है।

इस बीच, हम अंतरिक्ष में खोज, अनुसंधान और तो और उच्चतर इंटरनेट सेवा के लिए और अधिक उपग्रहों और रॉकेटों को अंतरिक्ष में भेजते रहेंगे! ऐसा लग रहा है कि हम अंतरिक्ष में और अधिक कूड़ा जमा करने वाले हैं। इसे हटाने और पुनरवृत्त करने के लिए भी कोई सुलभ तरीका ढूँढना होगा।

अगर आपके पास कोई दिलचस्प विचार हो तो हमें mail@currentkids.in पर भेजें!

इस लेख में चर्चित विषय के बारे में अधिक जानकारी के लिए यहाँ कुछ संसाधन दिए गए हैं:

https://spaceplace.nasa.gov/spacecraft-graveyard/en/

https://phys.org/news/2018-03-nemo-earth-watery-graveyard-spacecraft.html

https://www.nationalgeographic.com/science/space/reference/space-junk/


लेखक: आकाश दुबे और सुनैना मूर्ति


पिक्चर कंटेंट: वह क्षेत्र जो किसी भी बंजर ज़मीन से सबसे दूर है, कुछ समुद्री जीवन, इसका नाम कप्तान निमो के लिए रखा गया जिन्हें जुल्स वर्न ने हीरो बनाया, 2001 में 120 टन का एमआइआर यहाँ गिरा, 2024 के बाद 420 टन का आइएसएस यहाँ गिर सकता है, 260 से भी ज़्यादा मलबा जो ज़्यादातर रुसी उपग्रहों के टुकडें हैं वहाँ जमा है।

सिडनी, प्रशांत महासागर, लॉस एंजेलिस, पिटकेर्न द्वीप, पॉइंट निमो, सैंटियागो