इलेक्ट्रिक कार्स का क्या चल रहा है?

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आपने टेस्ला रोडस्टर, टोयोटा प्रियस, यहाँ तक कि महिंद्रा इ2ओ (पहले रेवा नाम से जानी जाती थी) के बारे में ज़रूर सुना होगा, पर आप इलेक्ट्रिक कार्स और इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) के बारे में कितना जानते हैं?

मार्केट: 2017 में, पहली बार इलेक्ट्रिक वाहनों की ग्लोबल सेल एक मिलियन यूनिट्स के पार गई। अब सड़कों पर इन वाहनों की कुल संख्या 3 मिलियन से अधिक हो गई है। पर कुल कारों की तुलना में यह प्रतिशत बेहद कम है। इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी का मानना है कि 2030 तक पूरी दुनिया में 125 मिलियन कारें सड़कों पर होंगी, जबकि जीवाश्म ईंधन से चलने वाली कारों की संख्या 2 बिलियन के करीब होगी!

Credit: International Credit Agency

इलेक्ट्रिक वाहन क्या है? सड़कों पर दिखने वाली ज़्यादातर कारों में इंटरनल कम्बशन इंजन (आईसीई) होते हैं। ये कारें पेट्रोल या डीज़ल जैसे ईंधन से चलती हैं। जबकि इलेक्ट्रिक वाहन इलेक्ट्रिक मोटर्स से चलते हैं और ये पर्यावरण के लिए काफ़ी बेहतर हैं, यदि इसमें इस्तेमाल होने वाली इलेक्ट्रिसिटी सौर्य या पवन ऊर्जा जैसे साफ़ और रिन्युवेबल स्त्रोतों से उत्पन्न की गई हो।

इलेक्ट्रिक कार्स क्यों ज़रूरी हैंदुनिया भर में पर्यावरण परिवर्तन और बढ़ते प्रदूषण के कारण ऑटो इंडस्ट्री पर ग्राहकों एवं सरकारों द्वारा लगातार दबाव डाला जा रहा है पर्यावरण हितैषी वाहनों के निर्माण के लिए। यह कैसे होगा?  ऐसी कारों का निर्माण करके जिनका परफॉर्मेंस हाई हो, कम ईंधन का उपयोग हो और पर्यावरण के लिए हानिकारक गैसों का उत्सर्जन कम हो।  बैटरी की घटती कीमतों, सरकारों के सहयोग और टॉप कार निर्माताओं की प्रतिबद्धता के चलते निश्चित ही भविष्य में इलेक्ट्रिक कारों की संख्या अधिक होगी!

देश जो आईसीई वाहनों की बिक्री पर प्रतिबंध लगाने पर विचार कर रहे हैं

सब्सिडी और इंसेंटिव: सब्सिडी एक तरह से डिस्काउंट है जो किसी भी इंडस्ट्री को बढ़ावा देने के लिए प्रदान किया जाता है। सरकारें ईवी मार्केट की मदद के लिए सब्सिडी प्रदान करती रही हैं। नॉर्वे जैसे देशों में ईवी खरीदने वालों को कम टोल चुकाना होता है, साथ ही इन कारों की खरीदी पर उन्हें कम टैक्स देना पड़ता है। तकनीक बढ़ने के साथ ही, कुछ लोग उम्मीद कर रहे हैं कि 2024 तक इन वाहनों की कीमतें इतनी कम हो जाएंगी कि उन पर सब्सिडी देने की ज़रूरत ही नहीं होगी। डैम्लर, फोक्सवैगन, निसान और वॉल्वो जैसी अग्रणी कंपनियाँ अगले दशक तक अपने वाहनों को इलेक्ट्रीफाय करने की योजना बना चुकी है।

सीमित देशों में ही है इलेक्ट्रिक कारों का उल्लेखनीय मार्केट नॉर्वे, आइसलैंड, स्वीडन, चाइना, जर्मनी, यूएस और जापान जैसे देशों में इलेक्टट्रिक वाहनों की संख्या उल्लेखनीय है

तो सड़कों पर इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या ज़्यादा क्यों नहीं हैनियमित कारों की तुलना में इलेक्ट्रिक कार बनाना अब भी अधिक महंगा है। इसका कारण है इन कारों के निर्माण में लगने वाले कोबाल्ट और लिथियम जैसे दुर्लभ मटेरियल। इन कारों को पूरी तरह चार्ज करने के लिए बहुत अधिक समय चाहिए होता है क्योंकि इनकी रेंज सीमित है। लंबी यात्रा के दौरान इन्हें चार्ज करने के लिए आपको बार-बार रुकना होगा। दुर्भाग्य से ईवी इंडस्ट्री अभी बढ़ ही रही है और इसलिए पर्याप्त चार्जिंग स्टेशन नहीं हैं।

हम इस मार्केट से 2040 तक क्या उम्मीद कर सकते हैं?

  • अनुमान है कि 2040 तक, सभी नई कारों की बिक्री में 55%  और दुनिया भर की कारों में 33%  इलेक्ट्रिक कार होंगी।
  • चीन सबसे बड़ा इलेक्ट्रिक कार मार्केट है और 2040 तक भी रहेगा।
  • भारत का लक्ष्य है अगले पांच सालों में इलेक्ट्रिक वाहनों का 15 % मार्केट शेयर हासिल करना।
Thomas Edison and an electric car. Courtesy of the Smithsonian

थॉमसन एडिसन, इलेक्ट्रिक कार के साथ। स्मिथसोनियन के सौजन्य से

क्या आप जानते थे?

स्कॉटिश अविष्कारक रॉबर्ट एंडरसन ने 1832 में पहली इलेक्ट्रिक गाड़ी का अविष्कार किया था जो रिचार्ज ना होने वाले सेल से चलती थी!


लेखक : मुंबई निवासी ज़रिर दे वितरे सस्टेनेबिलिटी कंसल्टेंट हैं। वे चाय, लीगो, फुटबॉल और बास्केटबॉल के शौक़ीन हैं।

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