डीपफ़ेक क्या हैं?

इंटरनेट अजीब हरकतें और काल्पनिक चीज़ें करते हुए लोगों के वीडियो से भरा पड़ा है। उनमें से सब कुछ असली नहीं हैं, भले ही वे असली लगें। एक व्यक्ति का मुंह घूम रहा होगा, और आप सोच रहे होंगे कि वे जो कह रहे हैं वो सच है। लेकिन ऐसा नहीं है! ये डीपफ़ेक हैं।

डॉ फ़ेकेंस्टीन द्वारा ऐसा ही कुछ मज़ेदार पेश है सभी “फ़ुल हाउस” के दीवानों  के लिए!

ऐसा क्यों किया जाता है? कभी-कभी फ़ोटो और वीडियो को उसमें बोलने वाले व्यक्ति के चेहरे को छिपाने या मुखौटा लगाने के लिए बदल दिया जाता है। अगर उनकी पहचान उजागर हुई तो शायद वे खतरे में पड़ जाएंगे। कुछ ऐसा दिखाने के लिए बनाए जाते हैं जैसे कुछ लोग कुछ कह रहे हैं- नकली खबर फैलाने के लिए! यह बहुत खतरनाक हो सकता है। दुनिया के कई हिस्सों में राजनीतिक अशांति के इस दौर में बहुत कुछ दांव पर है, और 2020 में होने वाले अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव की तरह उच्च प्रोफ़ाइल चुनाव को देखते हुए शरारत करने वाले हम सभी को प्रभावित करने की कोशिश कर सकते हैं।

यह कैसे किया जाता है? ऐसा करने के लिए सीजीआई (कंप्यूटर जनरेटेड इमेजरी) सॉफ्टवेयर है – जैसे वे फिल्मों में उपयोग करते हैं। सॉफ्टवेयर समय के साथ बेहतर और बेहतर होता गया है। ऐसे ऐप भी हैं जो ऐसा कर सकते हैं। और एमआईटी डाउनलोड ने हाल ही में बताया कि ऐसा करने के लिए नई तकनीक विकसित की गई है। यह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग करता है जिसे 1.5 मिलियन चेहरों के डेटासेट के मुताबिक, किसी व्यक्ति के चित्र या वीडियो में तब तक बदलाव करने के लिए प्रशिक्षित है, जब तक कि वह वास्तविक व्यक्ति से बिल्कुल अलग दिखाई देने न लगे!

आप एक डीपफ़ेक का पता कैसे लगा सकते हैं? लोग यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं। गूगल और फेसबुक जैसी बड़ी टेक्नोलॉजी कंपनियां डीपफ़ेक का पता लगाने के लिए बड़ी रकम खर्च कर रही हैं।

इस बीच, जो कुछ भी आप देखते हैं, उस पर विश्वास न करें, और यह विश्वास  से पहले कुछ अलग स्रोतों से जानकारी की जांच करना एक अच्छा विचार है।


लेखक: सुनैना मूर्ति